सीयूएसबी में पुस्तक विमोचन समारोह, कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने किया नई पुस्तक का लोकार्पण
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 15 मई 2026,
गयाजी: शुक्रवार को दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर मेजर डॉ. वी. परिमला वेणु द्वारा लिखित पुस्तक ‘Contemporaneity of Conflicts and Thoughts in Postcolonial Drama’ का विमोचन किया गया। पुस्तक का लोकार्पण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने किया।
कुलपति ने पुस्तक को बताया महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान
पुस्तक विमोचन के अवसर पर प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने मेजर वेणु को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि पुस्तक को प्रकाशन तक पहुंचाने में उनका समर्पण, सूक्ष्म अध्ययन और प्रत्येक विवरण पर विशेष ध्यान अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि यह कृति उनकी प्रतिबद्धता, धैर्य और अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाती है तथा साहित्य एवं शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
उत्तर-औपनिवेशिक नाटक के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि मेजर डॉ. वी. परिमला वेणु अब तक एनसीसी, अंग्रेजी व्याकरण, व्यक्तित्व विकास, रिपोर्ट लेखन तथा तकनीक आधारित अंग्रेजी शिक्षण जैसे विषयों पर 12 पुस्तकें लिख चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘Grammar Made Easy in Anglo-Hindi’ नामक सह-लेखित पुस्तक भी प्रकाशित की है।
सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों को समझने का प्रयास
पुस्तक के विषय में जानकारी देते हुए मेजर वेणु ने बताया कि ‘Contemporaneity of Conflicts and Thoughts in Postcolonial Drama’ उत्तर-औपनिवेशिक नाटकों के माध्यम से समकालीन सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक संघर्षों का विश्लेषण करती है।
पुस्तक में पहचान, विस्थापन, प्रतिरोध, सत्ता, सांस्कृतिक स्मृति, राष्ट्रवाद, प्रवासन, लैंगिक राजनीति और नस्लीय तनाव जैसे विषयों पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसमें यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि औपनिवेशिक इतिहास के प्रभाव आज भी समकालीन समाज और साहित्यिक चिंतन को प्रभावित कर रहे हैं।
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री
यह पुस्तक उत्तर-औपनिवेशिक साहित्य, नाट्य अध्ययन और सांस्कृतिक अध्ययन से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री मानी जा रही है। पुस्तक साहित्य और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक विमर्शों के बीच संबंधों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।
अकादमिक जगत में सीयूएसबी की बढ़ती पहचान
सीयूएसबी में लगातार हो रहे शोध, प्रकाशन और अकादमिक गतिविधियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों से जोड़कर देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान की अकादमिक प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
