उत्तर कोयल जलाशय परियोजना की प्रगति की समीक्षा, 31 मार्च 2026 तक शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने का डीएम का निर्देश

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 09 फरवरी 2026,

गयाजी; ज़िला पदाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में आज उत्तर कोयल जलाशय परियोजना (North Koel Reservoir Project) की प्रगति को लेकर एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। ₹1367.61 करोड़ की लागत से संचालित यह अंतर-राज्यीय परियोजना झारखंड एवं बिहार के बीच सिंचाई और जल संसाधन के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है, जिससे गयाजी एवं औरंगाबाद जिलों में कृषि उत्पादन को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है।

बैठक में वाप्कोस लिमिटेड के पदाधिकारी, परियोजना के कार्यरत संवेदक तथा उत्तर कोयल नहर परियोजना से जुड़े संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान गया जिला क्षेत्र में पड़ने वाले पैकेज-10 एवं पैकेज-11 के कार्यों की प्रगति पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

पैकेज-10 (सितहल गांव से नीमा गांव तक)

पैकेज-10 आमस अंचल के सितहल गांव से प्रारंभ होकर नीमा गांव तक विस्तारित है, जिसकी कुल लंबाई 6.51 किलोमीटर है। ज़िला पदाधिकारी ने मिट्टी कार्य को शीघ्र पूर्ण कराने एवं नहर पक्कीकरण का कार्य सात दिनों के भीतर प्रारंभ कराने का निर्देश दिया। कार्यपालक अभियंता ने बताया कि इस पैकेज के अंतर्गत एसएलआर ब्रिज, डीएलआर ब्रिज, सुपर पैसेज सहित कुल 19 संरचनाओं का निर्माण किया जाना है, जिनमें से 02 संरचनाएं पूर्ण हो चुकी हैं तथा शेष पर तेजी से कार्य जारी है।

पैकेज-11 (नीमा गांव से जय बिगहा तक)

पैकेज-11 आमस के नीमा गांव से प्रारंभ होकर गुरुआ प्रखंड के जय बिगहा तक फैला है, जिसकी कुल लंबाई 12.5 किलोमीटर है। इसमें 11.50 किलोमीटर क्षेत्र में मिट्टी का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि 4.50 किलोमीटर में नहर पक्कीकरण का कार्य भी पूरा हो चुका है। शेष हिस्सों में पक्कीकरण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। इस पैकेज में कुल 28 संरचनाओं का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से 6 संरचनाएं पूर्ण हो चुकी हैं।

समीक्षा के दौरान ज़िला पदाधिकारी ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि हर हाल में 31 मार्च 2026 से पूर्व उत्तर कोयल नहर परियोजना का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया जाए। उन्होंने परियोजना में प्रयुक्त मशीनरी एवं मैनपावर की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए, ताकि कार्य की गति में और तेजी लाई जा सके।

परियोजना का महत्व:

उत्तर कोयल नदी का उद्गम छोटा नागपुर पठार से होता है और यह झारखंड के लातेहार जिले से होकर सोन नदी में मिलती है। इस परियोजना के माध्यम से पलामू, गढ़वा, औरंगाबाद एवं गयाजी जिलों में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। मुख्य नहर के पुनर्जीवन एवं संरचनाओं के पक्कीकरण से शाखा नहर, वितरणी एवं उप-वितरणी नहरों के जरिए किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा।

परियोजना के पूर्ण होने से गयाजी जिले में लगभग 25 से 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी। इससे आमस, गुरुआ, गुरारू, कोच एवं परैया अंचलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना है।

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