किलकारी बाल भवन में रंगमंचीय साधना का प्रभावशाली समापन
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 06 फरवरी 2026,
गयाजी। किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी के सांस्कृतिक प्रेक्षागृह सह कला सभागार में शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को 15 दिवसीय ‘प्रस्तुति परख’ नाट्य कार्यशाला का समापन भव्य और प्रभावशाली रंगमंचीय प्रस्तुति के साथ संपन्न हुआ। संध्या 6:00 बजे से प्रारंभ हुए इस समारोह ने दर्शकों को आरंभ से अंत तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा।
‘जंगल जातकम’ के मंचन से उभरा पर्यावरणीय संदेश
समापन अवसर पर प्रस्तुत नाटक प्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह की कहानी ‘जंगल जातकम’ पर आधारित था, जिसे वरिष्ठ रंगकर्मी एवं एनएसडी 2000 बैच के एलुमिनी विनोद राई ने नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन प्रदान किया। इस रूपांतरण में ‘हिटलर’ नामक एक विशिष्ट चरित्र को जोड़ा गया, जो वन विभाग का उच्च पदस्थ अधिकारी है और समय को सर्वोपरि मानने वाली कठोर मानसिकता का प्रतीक है।
विकास बनाम प्रकृति की टकराहट का सशक्त चित्रण
नाटक में विकास की अंधी दौड़ में हो रहे पर्यावरणीय विनाश और मानव स्वार्थ को गहन संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। जंगल को एक आत्मनिर्भर और संवेदनशील समाज के रूपक के रूप में दिखाया गया, जिसे मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए नष्ट कर रहा है। हिटलर की जंगल कटान और व्यापारिक सोच प्रकृति के संतुलन को तोड़ती है, जिसका दुष्परिणाम पूरे पर्यावरण पर पड़ता है।
बट वृक्ष और प्रकृति की सामूहिक चेतना
कहानी में जंगल का सबसे अनुभवी बट वृक्ष तथा पेड़, पत्तियाँ, डालियाँ और हवा जैसे प्रकृति के तत्व एकजुट होकर हिटलर को उसके कर्मों का बोध कराते हैं। बच्चों के अपहरण के प्रतीकात्मक प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार मनुष्य अपने बच्चों से भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है, उसी प्रकार प्रकृति भी अपने अस्तित्व और अपनों के प्रति संवेदनशील है।
30 बच्चों की प्रस्तुति बनी कार्यशाला की पहचान
विनोद राई के कुशल निर्देशन में किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी के 30 बच्चों ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और कलात्मक परिपक्वता के साथ मंच पर प्रस्तुति दी, वह दर्शकों के लिए अविस्मरणीय रही। संवाद अदायगी, भाव-प्रदर्शन, मंचगत गतिशीलता और सामूहिक तालमेल ने यह सिद्ध कर दिया कि यह प्रस्तुति एक सघन रंगमंचीय साधना का परिणाम थी।
संगीत, मंच और प्रकाश ने बढ़ाया नाटकीय प्रभाव
नाटक की संगीत परिकल्पना पटना से आए आसिफ एवं सहदेव द्वारा की गई, जिसने कथा की संवेदनाओं को गहराई प्रदान की। मंच एवं प्रॉप्स निर्माण सुभाष कुमार (पटना) द्वारा किया गया, जबकि प्रकाश परिकल्पना रोशन कुमार की रही। तकनीकी पक्षों ने नाटक को दृश्यात्मक रूप से अत्यंत प्रभावी बना दिया।
“किलकारी बिहार बाल भवन बच्चों के सर्वांगीण विकास की एक सशक्त प्रयोगशाला है। रंगमंच बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामाजिक चेतना विकसित करता है।”
राजीव रंजन श्रीवास्तव, प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक
“यह कार्यशाला बच्चों के लिए केवल अभिनय नहीं, बल्कि जीवन को समझने और अभिव्यक्त करने की प्रक्रिया रही।”
आकाश कुमार, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी
सम्मान, प्रमाण-पत्र और तालियों से गूंजा सभागार
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही, निर्देशक विनोद राई को अंगवस्त्र एवं सम्मान-पत्र भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। समारोह में उपस्थित अभिभावकों, रंगकर्मियों, कला प्रेमियों एवं गणमान्य अतिथियों ने बच्चों की प्रस्तुति की खूब सराहना की। इस अवसर पर सहायक लेखा पदाधिकारी गुड़िया कुमारी, प्रमंडल संसाधन सेवी सोनम कुमारी, प्रशिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। पूरा सभागार देर तक तालियों और प्रशंसा से गूंजता रहा।