गया में 90 दिवसीय विशेष मध्यस्थता अभियान शुरू, लंबित वादों के त्वरित निस्तारण पर जोर
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 जनवरी 2026,
गयाजी; राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार, नई दिल्ली के निर्देश पर बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गयाजी द्वारा 90 दिवसीय विशेष मध्यस्थता अभियान (Drive–2) की शुरुआत कर दी गई है। यह अभियान 2 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक व्यवहार न्यायालय गयाजी, व्यवहार न्यायालय शेरघाटी एवं व्यवहार न्यायालय टिकारी में संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मध्यस्थता के माध्यम से लंबित वादों का सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित निष्पादन करना है।
अभियान की शुरुआत के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन किशोर कौशिक ने कहा कि न्यायालयों में मामलों की अत्यधिक पेंडेंसी को देखते हुए मध्यस्थता समय की आवश्यकता है। उन्होंने इसे राष्ट्रहित में बताते हुए कहा कि मध्यस्थता से न केवल विवादों का समाधान सरल होता है, बल्कि न्याय की प्रक्रिया भी सुगम बनती है। इससे समाज में शांति और सद्भाव बढ़ता है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे मुकदमेबाजी के स्थान पर अधिक से अधिक मध्यस्थता की प्रक्रिया को अपनाएं।
प्राधिकार के सचिव सह अवर न्यायाधीश अरविंद कुमार दास ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष अभियान के तहत वैवाहिक विवाद (मैट्रिमोनियल केस), घरेलू हिंसा के मामले, उपभोक्ता वाद, पारिवारिक बंटवारा से जुड़े वाद, बेदखली के मामले, सड़क दुर्घटना में मुआवजा, चेक बाउंस (धारा 138, एनआई एक्ट), ऋण एवं रिकवरी, भूमि विवाद सहित अन्य दीवानी वादों तथा समझौता योग्य आपराधिक मामलों का निस्तारण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 2 जनवरी 2026 से 30 मार्च 2026 तक चलने वाले इस अभियान के दौरान विभिन्न न्यायालयों में लंबित ऐसे वादों के सभी पक्षकारों को नोटिस तामिला कराई जा रही है। मध्यस्थ न्यायिक पदाधिकारी एवं प्रशिक्षित अधिवक्ता सदस्यों की टीम द्वारा दबाव रहित, निष्पक्ष और सौहार्दपूर्ण वातावरण में विवादों का समाधान कराया जा रहा है।
सचिव ने कहा कि मध्यस्थता एक सरल, निष्पक्ष और आधुनिक प्रक्रिया है, जिसमें दोनों पक्ष अपनी स्वेच्छा से समाधान तक पहुंचते हैं। यह प्रक्रिया खर्च रहित होने के साथ-साथ समय की भी बचत करती है और न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने में सहायक है। मध्यस्थता के माध्यम से लिया गया निर्णय सर्वमान्य, स्थायी और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने वाला होता है। यह पूरी तरह अनौपचारिक, निजी और गोपनीय प्रक्रिया है, जिससे आमजन को न्यायालयों के अनावश्यक चक्कर से मुक्ति मिलती है।