तिलकुट का मीठा मौसम शुरू, शहर से गांव तक गूंज रही कुटाई की थाप

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 नवम्बर 2025,

गयाजी: ठंड की शुरुआत होते ही बिहार में तिलकुट बनाने का सीजन पूरे जोर-शोर से शुरू हो गया है। शहर हो या गांव, हर तरफ तिलकुट कुटने की थाप सुनाई दे रही है। कारीगर दिन-रात मेहनत कर बढ़ती मांग को पूरा करने में जुटे हैं। गया जिले में तो यह मौसम एक उत्सव की तरह होता है।

गया का तिलकुट देशभर में काफी प्रसिद्ध है। इसके स्वाद और गुणवत्ता ने इसे जीआई टैग की पहचान भी दिलाई है। यहां आने वाला हर पर्यटक गया का तिलकुट जरूर साथ लेकर जाता है।

तिलकुट उद्योग से जुड़े उत्पादनकर्ताओं का कहना है कि इस बार मांग अच्छी है और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। कई जगहों पर अतिरिक्त श्रमिकों की भी सेवा ली जा रही है। परंपरागत ढंग से भुने तिल और गुड़-चीनी की मिठास से तैयार तिलकुट सर्दी में ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

भारतीय डाक विभाग भी हर वर्ष तिलकुट की मांग को देखते हुए देश भर में डिलीवरी के लिए विशेष व्यवस्था करता है, ताकि ग्राहकों तक समय पर शुद्ध और सुरक्षित तरीके से तिलकुट पहुंच सके।

बाजार में तिलकुट की कई वेराइटी उपलब्ध हैं—
• गुड़ वाला तिलकुट (सबसे लोकप्रिय)
• चीनी वाला तिलकुट
• ड्राई फ्रूट मिश्रित प्रीमियम तिलकुट

कीमतें भी गुणवत्ता और श्रेणी के आधार पर भिन्न हैं। बाजारों में तिलकुट 150 रुपये प्रति किलो से 400 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध है।

मौसम के साथ-साथ तिलकुट की बिक्री भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि बिहार की परंपरा और स्वाद का यह प्रतीक न केवल मिठास बांटता है बल्कि यहां की सांस्कृतिक पहचान को भी आगे बढ़ाता है। तिलकुट कुटाई की रौनक ठंड के पूरे मौसम में इसी तरह बनी रहने वाली है।

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